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गलती से खाता में आया 1 करोड़ 48 लाख, आगे की जाने कहानी

गलती से खाता में आया 1 करोड़ 48 लाख

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विंध्याचल धाम से समिति के पदाधिकारियों ने किया वापस, लखनऊ के व्यापारी की भूल को मनी रिटर्न कर किया गया भूल सुधार

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मिर्जापुर। विंध्याचल धाम में आयोजित कार्यक्रम के लिए लखनऊ की संस्था ने 11 हजार रुपया सहयोग राशि भेजा था। उसके दूसरे दिन 1 करोड़ 48 लाख 50 हजार 47 रुपया 20 पैसा फिर आ गया। कुछ देर बाद मनी कैपिटल लिमिटेड के मालिक को दूसरे खाते में रुपया भेजे जाने का एहसास हुआ। जिस पर उन्होंने श्री माँ विंध्यवासिनी सेवा समिति के संस्थापक मोहित मिश्रा को रिंग किया। उन्होंने अपनी गलती से आये एमाउंट के बारे में जानकारी दी। जिसे दूसरी जगह भेजना था। जो भूलवश संस्था के खाते में आ गया। जिसे कृपा कर वापस भेजने का अनुरोध किया। सायंकाल जिस वक्त काल आया बैंक के लेनदेन का समय समाप्त हो चुका था लिहाजा संस्था के संस्थापक मोहित मिश्रा ने अगले दिन भूल से खाते में आए धनराशि को वापस करने का भरोसा दिया। बुधवार को कंपनी के नाम 1 करोड़ 48 लाख 50 हजार 47 रुपया 20 पैसे का चेक बनाकर जिस खाते से धन आया था उसी में धनराशि भारतीय स्टेट बैंक विंध्याचल शाखा के माध्यम से वापस भेजा गया।

 

सेवा समिति के संस्थापक मोहित मिश्रा ने बताया कि धाम में आयोजित होने वाले कार्यक्रम के दौरान कंपनी के मालिक ने अपना सहयोग राशि प्रदान किया था। गलती से दूसरे दिन भी किसी अन्य को भेजे जाने वाला अमाउंट संस्था के खाते में आ गया। जिसे संयुक्त खाता होने के चलते समिति के कोषाध्यक्ष बादल मिश्रा और मेरे हस्ताक्षर से वापस कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि माता विंध्यवासिनी के भक्तों को किसी भी प्रकार का कोई कष्ट ना हो यह प्रार्थना निरंतर श्री विंध्य पंडा समाज के सदस्यों के द्वारा किया जाता है। कहा कि गलती किसी से भी हो सकती है । जिसका सुधार कर लिया गया है।

माँ विंध्यवासिनी दरबार में देश विदेश से यात्री जुड़े हुए है, दान दक्षिणा भी भेजते रहते है लेकिन

एक वाक्या कल

मेरे मोहित मिश्रा और बादल जी के ज्वाइंट अकाउंट में लखनऊ के किसी यात्री का 1.48.50000 एक करोड़ अड़तालीस लाख पचास हज़ार रुपये गलती से आ गया लेकिन कल से आज में उन माँ के भक्त के अकाउंट में वापिस कर माँ के दरबार और यहा के पुरोहित की गरिमा बनी रहे,

यहाँ के पुरोहित माँ के भक्तों का ध्यान पूरी ईमानदारी से करते है, यात्री बहुत खुश है और यहाँ के पुरोहितों का और माँ के दरबार का खूब गुड़गान कर रहे।

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